A SHORT STORY

टेनिस के अण्डे

बिन्नी को चिड़िया पालने का बड़ा शौक है ।

वह हमेशा सोचती रही कि जब वह बड़ी होगी तो कई सारी अलग अलग चिड़ियों को घर में पालेगी।

स्कूल से लौटते समय उसका सारा ध्यान पेड़ों पर मँडरा रही चिड़ियों पर ही रहता।

कल सुबह पापा के साथ बर्ड वाचिंग कैंप गई थी बिन्नी।

बड़े सारस का जोड़ा, सुनहरी पनडुब्बी, किंगफिशर, सफेद बाज और पैराडाइज़ फ्लाईकैचर देखे उसने। गाइड को बहुत जानकारी थी पक्षियों के बारे में। वह हर पक्षी का ठिकाना, उनकी आदतें, खान- पान, आवास- प्रवास और ब्रीडिंग (अंडे देने का समय) के बारे में विस्तार से बता रही थी।

बर्ड वाचिंग कैंप से लौटते समय नेचर क्लब के वालेंटियर ने सभी को कार्ड बोर्ड से बना हुआ छोटा घर दिया। यह गौरैया के लिए घोसला था। उन्होंने कहा कि इसे अपने आँगन में किसी ऊंची जगह या पेड़ पर या छत पर सुरक्षित जगह पर रखें। गौरैया इसमें अपने अंडे देगी और बच्चे पालेगी। एक वालेंटियर एक घेरे में खड़े होकर बोल रही थी – ‘गौरैया लगातार कम हो रही हैं। क्लाइमेट चेंज और पेड़ों के कटने से उनके प्राकृतिक आवास छिन्न भिन्न हो गए हैं। इसलिए ये सब प्रयास करके हमें उन्हें सुरक्षित करना है और उनकी आबादी बढ़ाना है’।

बिन्नी कार्ड बोर्ड के उस घोसले को पाकर बहुत खुश थी। उसने बालकनी के कोने में पुराने बेकार पड़े हुए कूलर के ऊपर कोने में उसे जमा दिया। यह सुरक्षित जगह थी।

बिन्नी के लिए अब यह एक नया काम था। वह रोज सुबह बिस्तर से उठकर सीधे बालकनी की तरफ भागती और उसके अंदर झाँककर देखती।

स्कूल में भी दोस्तों के साथ बातचीत में वह अपनी इस गौरैया मुहिम के बारे में हर रोज चर्चा करती।

स्कूल से लौटकर भी एक बार जरूर घोंसले में झांकती।

स्कूल में उसके दोस्तों ने बताया कि उसमें घास फूस रखो। रुई के फ़ाहे रखो, पुराने कपड़ों की कतरने रखो ताकि गौरैया को अंडे देने के लिए वो घोंसला सुविधाजनक लगे।

बिन्नी ने ढूंढ ढूंढ कर सारी चीजें इकट्ठी की। 15 बीस दिन गुजर गए पर बालकनी में गौरैया का आना तो दूर उसकी कोई आवाज तक सुनाई न दी।

दो महीने बीत गए। बिन्नी अब थोड़ा निराश हो चली थी। पर उसने उम्मीद नहीं छोड़ी थी। आज स्कूल से लौटने पर माँ ने बताया कि एक कबूतर जरूर काफी देर तक कूलर के ऊपर बैठ रहा। पर गौरैया की तो ची- ची भी सुने एक लंबा अरसा हो गया।

माँ की बात सुनकर बिन्नी का चेहरा खिल उठा। उसे लगा कबूतर आया है तो गौरैया भी जरूर आएगी। शायद अब पक्षियों के बीच में उसके रखे घोंसले के बारे में बातें हो रही होगी। अब गौरैया को पता चल गया होगा। वह अपने अंडे देने जरूर आयेगी।

घर में बुआ का बेटा आदित्य आया है। कल उसका जिला स्तर का टेनिस का मैच है। बिन्नी ने स्कूल से लौटकर आदित्य भईया को अपने गौरैया का घोंसला दिखाया और उसकी तैयारी के बारे में विस्तार से बताया। आदित्य ने बिन्नी का दिल रखने के लिए कहा ‘हाँ अंडे देने का समय तो अब आया है। अब जरुर गौरैया आएगी’।

कल आदित्य भईया का मैच हो गया। वह शाम की बस से चले गए। रात भर बिन्नी गौरैया के अंडों के बारे में ही सोचती रही।

सुबह उठकर वह सीधे बालकनी की तरफ भागी। उसने घोंसले में झाँककर देखा। उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। कार्ड बोर्ड के भीतर अंधेरे में घास फूस और रुई के फ़ाहे के बीच दो चमकदार सफेद अंडे थे। वह माँ को आवाज लगाती हुई रसोई की तरफ भागी। माँ- माँ गौरैया ने अंडे दे दिए। दो दो दिए हैं’।

माँ ने वहीं से हिदायत दी ‘हाथ मत लगाना उसे’

बिन्नी उछल उछलकर सबको अभी ही बता देना चाहती थी कि गौरैया ने उसके घोसले में अंडे दे दिए हैं।

आज स्कूल के लिए वह जल्दी तैयार हो गई। दोस्तों को बताना जो था।

स्कूल में दिनभर गौरैया के अंडों को लेकर बातें होती रहीं। आज बिन्नी को स्कूल से लौटने की भी जल्दी थी। वह जल्द से जल्द अंडों में से बच्चों का निकलना देखना चाहती थी।

लौटने पर माँ ने सीधे कहा ‘देखो बिन्नी गौरैया सभी जगह से कम हो रही हैं। तुमने इतने दिनों में उन्हें कभी देखा या उनकी आवाजें सुनीं ?

बिन्नी ने कहा ‘नहीं। लेकिन उससे क्या माँ। उसने अंडे तो दे दिए न। अब तो वो आएगी भी और अपने बच्चों को पालेगी भी’। बिन्नी की आँखेँ चहक रही थीं।

माँ ने कहा ‘बिन्नी, घोंसले में रखे अंडे गौरैया के नहीं हैं’।

‘तो क्या कबूतर ने अपने अंडे दिए ?’ बिन्नी चौंकी।

“मुझे अंधेरे में वो अंडे आकार में थोड़ी बड़े लगे भी थे” बिन्नी थोड़ा अनुमान लगाते हुए बोली।

अब तक माँ ने बालकनी में जाकर उस घोसले में हाथ डालकर अंडे निकाल भी लिए। बिन्नी चिल्लाई ‘ये क्या किया माँ, तुम्हें उन्हें हाथ से नहीं छूना था’

बिन्नी ने देखा माँ की हथेली पर रखे अंडे सचमुच थोड़ी बड़े थे।

तो क्या ये कबूतर के अंडे हैं माँ ? बिन्नी आगे बढ़ते हुए बोली।

‘अरी बिन्नी न तो ये गौरैया के अंडे हैं और न कबूतर के। ये टेनिस के अंडे हैं’।

‘टेनिस के अंडे ???’ बिन्नी फिर चौंकी

‘हाँ टेनिस के अंडे।

‘ये कौन सी चिड़िया है माँ ?’

‘अरे कोई चिड़िया विडिया नहीं। तुझे परेशान देखकर आदित्य अपनी टेनिस की दो नई बॉल घोंसले के अन्दर रख गया था। उसने कहा था मामी, गौरैया तो खत्म हो रही है। घरों में उनका आना भी अब बंद ही हो गया है। बिन्नी अंडे का इंतजार ही करती रहेगी’।

टेनिस के अंडे देखकर पहले तो बिन्नी को आदित्य भईया पर बहुत गुस्सा आया। फिर उसने माँ के हाथ से टेनिस के अंडे लेकर अपने स्कूल बैग में रख लिए। टेनिस के अंडे के बारे में स्कूल में भी तो बताना था।

अनिल सिंह , भोपाल